क्या आगामी लोकसभा चुनाव में भी मिलेगा बीजेपी को दलितों का साथ ?

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भारत में जिस तरह एससी/एसटी और ओबीसी शब्द लगातार गूंज रहे हैं, उससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि चुनावी मौसम बिलकुल नजदीक आ चुका है. यदि एससी/एसटी-ओबीसी कहे तो आम भाषा में पिछड़े और दलित. इस तरह के विशाल वोटर की टीम को बहुजन भी कहा जाता है. इस समय देश की सत्ता की चाबी इन्हीं गैर-सवर्ण हिंदू वोटरों के हाथों में है. जो की आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए अपने प्रधानमंत्री का फैसला करेगी

आपको वो समय तो याद ही होगा जब 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ ऐसा चमत्कार दिखाया था जिससे कि अब तक चलते आए तमाम जातीय समीकरण ध्वस्त हो गए और बीजेपी 30 साल में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करने वाली देश की पहली पार्टी बनी. भले ही पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी जादू चला हो पर इस चमत्कार की जरूरत पिछले बार से कहीं ज्यादा है क्योंकि अब हालात पहले से कुछ अलग हो गए हैं. क्योकि अब बीजेपी विपक्ष में नहीं सत्ता में है. विरोधियों पर उंगली उठाने के बदले उसे यह बताना होगा कि उसने सरकार में रहते हुए पिछड़ों और दलितों के लिए क्या किया है. जिससे की वह अपने आगामी चुनावी की नीव रख सके

बीजेपी ने किया दलितो को नाराज

पिछले लोकसभा का दौर पहला मौका था, जब मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को पूरे देश में पिछड़ो के साथ दलितों के वोट भी बड़ी तादाद में हासिल हुए. जबकि दलितों के नाम पर चलने वाली देश की सबसे बड़ी पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) का खाता तक नहीं खुला था, वहीं बीजेपी को भारी तादाद में रिजर्व सीटें मिलीं.

लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक खेमे में हालात पूरी तरह से बदल चुके हैं. अलग-अलग वजहों से दलित और ओबीसी केंद्र सरकार से नाखुश हैं. दिन प्रतिदिन दलितों पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं. गुजरात, राजस्थान और हरियाणा जैसे बीजेपी शासित राज्यों में घोड़ी चढ़ने से लेकर मूंछ रखने तक जैसी छोटी-छोटी बातों को लेकर कई दलितों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.
जहां तक हम ओबीसी वोटरों की बात करें तो, उनका एक बड़ा दल परंपरागत रूप से बीजेपी के साथ रहा है. लेकिन अब सबाल यह की क्या 2019 में भी ओबीसी का रुख बीजेपी को लेकर वही होगा जो की पिछले लोकसभा चुनाव में रहा था? इस बात को लेकर बीजेपी के दिग्गज नेता भी परशान नजर आ रहे हैं. जबकि विपक्ष द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार का रवैया सामाजिक न्याय के बिलकुल विपरीत है.वही ओबीसी कोटे में अपने आप को शामिल किए जाने की मांग को लेकर पश्चिम और उत्तर भारत के अलग-अलग हिस्सों में कई जातियां लगातार आंदोलन कर रही हैं.

अब सवाल यह की क्या बीजेपी इस बार भी पिछली लोकसभा चुनाव के चमत्कार को दोवारा दोहरा पाएगी या उसे विपक्षी गठबंधन द्वारा हार का सामना करना पड़ सकता है अब तो यह वक्त ही बताएगा की मोदी लहार दोबारा चल पाती है या नहीं या फिर मोदी सरकार सिर्फ विपक्ष बनकर ही बैठी रहेगी

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