Home पॉलिटिक्स महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने क्यों ठुकराया रिहाई का प्रस्ताव ? जानिए वजह…

महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने क्यों ठुकराया रिहाई का प्रस्ताव ? जानिए वजह…

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जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला पिछले 4 अगस्त से ही नजरबंद हैं। चूंकि घाटी में धीरे-धीरे हालात सामान्य होते जा रहे हैं, लिहाजा नजर बंद किए गए इन दोनों नेताओं को रिहा करने पर विचार किया जा रहा है। लेकिन जो खबर सामने आ रही है, उसके मुताबिक ये दोनों फिलहाल नजरबंद रहने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल प्रशासन की ओर से कुछ बड़े अधिकारियों ने कुछ दिन पहले ही नेशनल कॉनफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती से मुलाकात की है। खबरों की मानें तो मुलाकात के दौरान अधिकारियों ने रिहाई के लिए दोनों के सामने ‘कुछ शर्तें’ रखी हैं। बताया जा रहा है कि सरकार ने दोनों नेताओं को भरोसा दिलाया है कि अगर रिहा होने के बाद, वो कोई भी भड़काऊ बयान नहीं देंगे, जिससे घाटी में हालत बिगड़े, तो सरकार को उन्हें छोड़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी। लेकिन जो खबर सामने आ रही है, उसके मुताबिक उमर और महबूबा ने सरकार के इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया।

मिली जानकारी के मुताबिक उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती की ओर से रिहाई की शर्तें ठुकराए जाने के बाद, प्रशासन ने दोनों की नजरबंदी को बढ़ा दिया है। दोनों नेता राज्य की मौजूदा हालात पर नजर बनाए हुए हैं। जाहिर है अगर सरकार ने इन नेताओं के सामने रिहाई के लिए कोई शर्त लगाई है, तो उन्हें हिरासत से निकलने के लिए बेल बॉन्ड पर दस्तखत करने पड़ सकते हैं। लेकिन अगर उन्होंने बाहर निकलकर किसी सियासी दबाव में शर्तों का उल्लंघन किया, तो सरकार फिर से उनके खिलाफ ऐक्शन ले सकती है। ऐसे में जानकारी मिल रही है कि वे फिलहाल रिहाई के लिए किसी भी तरह की शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं।

जानकारों के मुताबिक केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा-370 हटाकर सूबे का पूरा सियासी परिदृश्य ही बदल दिया है। अब वहां की राजनीतिक पार्टियों का सारा सियासी एजेंडा ही बेकार पड़ चुका है। उनके सामने न तो ऑटोनोमी के नाम पर सियासत करने का मौका है और न ही वे सेल्फ रूल का नारा ही बुलंद कर सकेंगे। पाकिस्तान की आवाज बनकर कश्मीर की आजादी की बात करने वाले सियासतदानों की तो रोजी-रोटी पर ही बट्टा लग चुका है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर ये नेता बाहर आएंगे भी तो अपने समर्थकों को क्या कहकर राजनीतिक रोटी सेकेंगे?

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