देवरिया कांड के पीछे किसका हाथ ?

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बिहार के मुज़फ्फरपुर के महिला व बाल सरंक्षण गृह में चल रहे गडबडझाले की खबर फिलहाल न्यूज़ चैनल्स की ब्रेकिंग न्यूज़ लिस्ट से गायब हैं, लेकिन इस घटना को लेकर आम जनमानस का गुस्सा अभी भी शांत नहीं हुआ हैं | महिलाओं व बच्चियों को आश्रय देने के नाम पर चलाये जा रहे बिहार के इस महिला व बाल सरंक्षण गृह में हो रहे घिनौने अपराध के दोषी अभी तक सज़ा भी नहीं पा पाए थे कि उत्तर प्रदेश के देवरिया जिलें में एक ऐसा ही केस सामने आया हैं |

बंद हो चुकी संस्था में चल रहा था गोरखधंधा

मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सामाजिक सेवा संस्थान के नाम से यह शेल्टर हाउस चलाया जा रहा था | इस शेल्टर हाउस में पहले भी गड़बड़ियाँ पायी गयी थे जिनकी वजह से 2017 में इस सरंक्षण गृह को बंद कर दिया गया था तथा इसे हर प्रकार की वित्तीय सहायता देने से भी सरकार द्वारा इनकार कर दिया गया था| साथ ही यहाँ रह रही महिलाओं व लड़कियों को किसी और संस्था में शिफ्ट करने के आदेश भी दिए चुके थे | लेकिन इस सरंक्षण गृह को चलाने वाले पति-पत्नी की सरकारी अधिकारियों से सांठ-गाँठ के चलते अभी तक यह सरंक्षण गृह चल रहा था और इसमें बच्चियों का हर तरह से शोषण भी बदस्तूर जारी था |

यूँ हुआ खुलासा

दरअसल इस मामले का खुलासा तब हुआ जब यहाँ से एक बच्ची भाग निकलने में कामयाब हुई| लड़की भागकर महिला थाना पहुंची और और वहां उसने शेल्टर हाउस चल रहे इस गोरखधंधे के बारे में जानकारी दी | पुलिस ने भी तत्काल कार्यवाही करते हुए मां विन्ध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं सामाजिक सेवा संस्थान से 24 लड़कियों को आज़ाद कराया |

लेकिन कहा ये जा रहा है कि इस संस्थान में 42 लडकियां थी यानि बाकि की लड़कियों का सुराग लगाना भी अभी बाकी हैं | इस शेल्टर हाउस को चलाने वाले पति, पत्नी व उनके बेटे को गिरफ्तार कर लिया हैं | राज्य सरकार ने भी मामले के सामने आते ही जिले के जिलाधिकारी को निलम्बित कर दिया है | तीन अन्य अफसरों पर भी निलम्बन की गाज गिर सकती हैं | मुजफ्फरपुर की भांति अभी कोई बड़ा नाम देवरिया शेल्टर हाउस के केस में सामने नहीं आया हैं लेकिन पुलिस वालों को ऐसा लगता हैं कि इस मामले के पीछे भी कुछ रसूखदार लोगों का हाथ हो सकता हैं |

ऐसे होता था लड़कियों का शोषण

शेल्टर हाउस से भागी लड़की ने बताया कि इस संस्था में एक लड़की हैं जिसके लिए बच्ची दीदी शब्द का प्रयोग कर रही थी, रात को संस्था की संरक्षिका ‘दीदी’ को बाहर भेजती थी | लड़की के अनुसार उस ‘दीदी’ को रोज़ अलग अलग व बड़ी गाड़ियाँ लेने आती थी | रात में जाने के बाद सुबह जब उसकी दीदी आती तो वह सिर्फ रोती रहती थी | इसके साथ ही लड़की का यह भी कहना था कि उससे व दुसरी लड़कियों से झाड़ू-पोछें आदि का काम भी लिया जाता था | अन्य लड़कियों ने भी बड़ी लड़कियों के यौन शोषण की बात कबूली हैं |

इस संस्था का सच उजागर होने पर राज्य की योगी सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है और विपक्षी मुख्यमंत्री को कोस रहे हैं लेकिन राजनीती से परे बड़ा सवाल यह है कि गायब हुई लड़कियां हैं कहाँ ? कैसे यह प्रतिबंधित शेल्टर हाउस चल रहा था ? बंद किये जाने के आदेश के बावजूद अगर यहाँ लड़कियां रह रही थी तो जरुर इस संस्था को चलाने वाले लोगों पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति का वरदहस्त होगा | क्या यह सच यूपी पुलिस बाहर निकाल पायेगी ?

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