18 June 2021

पंजाब सरकार ने 18 से 44 आयु वर्ग के टीकाकरण के लिए निजी अस्पतालों को कोविड-19 टीका बेचने के फैसले को वापस ले लिया है। कोविड टीकाकरण के प्रदेश प्रभारी आइएएस विकास गर्ग ने यह आदेश जारी किया है। इस मामले में टीकाकरण के लिए निजी अस्पतालों की पैरवी कर मुख्य सचिव विनी महाजन घिर गईं।

पंजाब सरकार ने कहा कि निजी अस्पतालों के माध्यम से 18-44 वर्ष आयु वर्ग की आबादी को टीके की खुराक उपलब्ध कराने का आदेश वापस लिया जाता है। निजी अस्पताल अपने पास उपलब्ध टीके की सभी खुराक लौटा दें। सरकारी आदेश में कहा गया है, ‘निजी अस्पतालों को 18-44 वर्ष आयु वर्ग की आबादी के लिए खुराकें उपलब्ध कराने के आदेश को सही भावना से नहीं लिया गया है। लिहाजा इस आदेश को वापस लिया जाता है।’ पंजाब के कोविड टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभारी विकास गर्ग ने अपने आदेश में कहा, ‘इसके अलावा, यह निर्णय लिया गया है कि निजी अस्पतालों को उनके पास उपलब्ध टीके की सभी खुराकें तुरंत वापस करनी होंगी।’ आदेश में कहा गया है कि निजी अस्पतालों को जब टीका निर्माताओं से प्रत्यक्ष रूप से अपनी खुराकों की आपूर्ति हो जाएगी तब उन्हें वे खुराकें भी राज्य सरकार को लौटानी होंगी, जो वे इस्तेमाल कर चुके हैं।

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा है कि निजी अस्पतालों को कुल 42,000 टीके दिए गए थे जो हमने उनसे वापस ले लिए हैं। मुख्यमंत्री ने तुरंत घटना का संज्ञान लिया और इस निर्णय रद्द कर दिया गया है। टीके की अतिरिक्त कीमत चुकाने वालों को प्रतिपूर्ति मिलेगी।

दरअसल, पंजाब सरकार पर आरोप लग रहे थे कि राज्य के कोटे के तहत खरीदी गई वैक्सीन को निजी अस्पतालों को बेचा गया है और उसके जरिए राज्य सरकार मुनाफा कमाने में लगी हुई है। विपक्ष ने इसे मुद्दा बनाया तो आनन-फानन सरकार को अपनी टीका नीति में बदलाव करना पड़ा है। पंजाब में सरकार द्वारा टीकों को राज्य के निजी अस्पतालों को 1,060 रुपए प्रति खुराक की दर से बेचे जाने का खुलासा हुआ था। सरकार ने इन कोरोना टीकों को चार सौ रुपए की दर पर खरीदा था। सरकार से खरीदे टीकों को निजी अस्पताल 1560 रुपए में बेच रहे थे।

इस मामले को लेकर विपक्ष हमलावर हुआ। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसे मुद्दा बनाया। शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल ने हाईकोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस मामले में निजी अस्पतालों के नाम ट्वीट कर मुख्य सचिव विनी महाजन घिर गईं। अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने कहा कि मुख्य सचिव विनी महाजन ने ट्वीट कर लोगों को निजी अस्पतालों में टीके लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विनी महाजन ने निजी संस्थानों के लिए सेल्समैन की तरह काम किया। उन्होंने विनी महाजन का एक ट्वीट दिखाया, जिसमें वह निजी अस्पतालों में 900 और 1200 देकर टीका लगवाने की बात कह रही हैं।

इस मामले में घिरीं मुख्य सचिव विनी महाजन 1987 बैच की आइएएस अधिकारी हैं। वे पंजाब की पहली महिला मुख्य सचिव हैं। विनी महाजन राज्य में एकमात्र पंजाब कैडर की अधिकारी हैं, जिन्हें भारत सरकार में बतौर सचिव के तौर पर सूचीबद्ध किया गया। वे केंद्र के विभिन्न विभागों के अलावा मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान 2005 से 2012 तक प्रधानमंत्री कार्यालय में वित्त, उद्योग एवं वाणिज्य, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी आदि मामले देख चुकी हैं।

केंद्र ने मांगी सफाई
केंद्र ने पंजाब सरकार से मीडिया में आईं उन खबरों पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि उसने निजी अस्पतालों को कोविड-19 रोधी टीके ‘बेचकर’ मुनाफा कमाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव वंदना गुरनानी ने पंजाब के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को लिखे पत्र में कहा कि प्रथम दृष्ट्या यह ‘उदारीकृत मूल्य निर्धारण व त्वरित राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण रणनीति’ का स्पष्ट उल्लंघन है। पत्र में कहा गया है, जैसा कि आप जानते हैं कि एक मई 2021 को उदारीकृत मूल्य निर्धारण व त्वरित राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण रणनीति लागू की गई। रणनीति के अनुसार निजी अस्पताल टीका निर्माताओं से प्रत्यक्ष रूप से टीके खरीद रहे हैं। लिहाजा राज्य सरकार से इन समाचारों की सत्यता की पुष्टि करने और इस संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को तत्काल स्पष्टीकरण भेजने का अनुरोध किया जाता है।



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