Home मनोरंजन मूवी रिव्यु: एक और हिट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती कंगना की फ़िल्म पंगा

मूवी रिव्यु: एक और हिट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती कंगना की फ़िल्म पंगा

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आजकल मसाला मूवी की भरमार है जिसमे आपको तड़क- भड़क गाने के साथ दमदार डायलॉग सुनने को भी मिल जाएंगे। लेकिन सीधी सीधी सहजता से कोई मूवी अगर आपके दिल को छू ले, तो ऐसी मूवी अपने आप में हिट है। पंगा , अश्विनी अय्यर के निर्देशन में बनी फ़िल्म ऐसे ही मूवी की कतार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही है।

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फ़िल्म की कहानी

फ़िल्म की कहानी जैसे कि फ़िल्म के प्रोमो में ही समझ आ जाता है कि जया निगम जिसका किरदार कंगना रनौत ने निभाया है, एक नेशनल लेवल पर कब्बडी टीम की कप्तान रह चुकी है और 7 साल के बच्चे की माँ है। वो रेल्वे में टिकट काटने का काम करती है और उसके मन मे कही ना कही कसक रहती है आगे ना खेल पाने की। उसकी जिंदगी आम औरतों की तरह नौकरी और परिवार में आगे बढ़ रही होती है। परिवार की जिम्मेदारियों में उसका कब्बडी खेलना कही दूर खो सा गया है। बस एक दिन जिंदगी उसे फिर से मौका देती है और उसका बेटा ( यज्ञ भसीम) उसे फिर से कमबैक करने के लिए प्रेरित करता है। जिसमे उसे अपने पति( जस्सी गिल)  ,बच्चे, मां( नीना गुप्ता)  का भरपूर साथ मिलता है। एक मां को फिर से अपने सपने को पूरा करने के लिये क्या क्या खोना पड़ता है। कैसी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, वह इस फ़िल्म में दिखाया गया है।

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अभिनय

एक्टिंग की बात की जाए तो एक मध्यमवर्गीय गृहिणी और एक कब्बडी प्लेयर के रोल में कंगना पूरी तरह से घुस गई है। उनकी दमदार एक्टिंग कही पर भी एक्टिंग नही लगती है। इतनी सहजता से उन्होंने रोल में जान डाली है कि आप उनके एक्टिंग के कायल हो जाएंगे। उनके पति के रोल में पंजाबी सिंगर जस्सी गिल ने भी बहुत ही उम्दा अभिनय किया है। उनका बेटा बना यज्ञ भसीम ने भी बहुत जोरदार अभिनय किया है। नीना गुप्ता जो कि कंगना की मां बनी है, इस फिल्म में अपनी छाप छोड़ती है। ऋचा चड्ढा ने भी अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है।

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फ़िल्म का लेखन और निर्देशन अश्विनी अय्यर ने बहुत ही उम्दा किया है। एक माँ के मन को , उसके सपनो को, उसके पूरा कर ना पाने की कसक और परिवार का प्यार सभी चीजों को फ़िल्म के माध्यम से उन्होंने बहुत ही सरल तरीके से दर्शकों तक पहुँचाया है। इस फ़िल्म में हर रिश्ते को चाहे माँ बेटे का हो, या पति पत्नी का खूबसूरती के साथ पर्दे पर पेश किया गया है। यह फ़िल्म में कही आप मुस्कुरायेंगे तो कही पर भावनाओं में डूबा हुआ महसूस करेंगे।

 

कमी

बात यदि फिल्म में कमी की जाए तो फिल्म की कहानी जानी पहचानी है, ऐसे में फिल्म की तुलना दंगल, मैरीकाम जैसे फिल्मों से होना लाजिमी है| फिल्म में संगीत की बात करे तो फिल्म में गाने बहुत कम है और जो भी गाने है आपको याद नहीं रह जायेंगे|

क्यों देखे यह फिल्म

फिल्म की कहानी जरूर साधारण , और जानी पहचानी हा पर यह फिल्म आपको कही पर भी बोर होने नहीं देगी| सभी कलाकारों का सहज और उम्दा अभिनय आपको फिल्म के आख़री तक बाँध कर रखेगा| आप इस फिल्म को अपने परिवार के साथ जरूर देखने जाए, क्योकि यह फिल्म एक परिवार के साथ का सकारात्मक पक्ष रखती है| यह फिल्म हर उस महिला को समर्पित है, जो अपने सपने पूरे करने के लिए पंगा लेना जानती है| इस फिल्म को 5 में से 4 स्टार देना सही होगा|

 

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