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सऊदी अरब में नौकरी क्यों गंवा रहे हैं पाकिस्तानी डिग्री वाले ?

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पाकिस्तान भले ही खुद को तीस मार खां समझ रहा हो, हर मोर्चे पर भारत से मुकाबला करना चाहता हो, लेकिन भारत की तुलना में वो कहीं नहीं ठहरता है। एक ओर जहां भारत से डिग्री पाने वालों की दुनियाभर में कद्र की जाती है, तो वहीं पाकिस्तान से डिग्री वालों को कोई पूछने वाला नहीं है।

दऱअसल सऊदी अरब देश में काम कर रहे सैकड़ों पाकिस्तानी डॉक्टर्स अपनी नौकरी गंवा बैठे हैं। इतना ही नहीं सऊदी अरब के पाकिस्तान की मेडिकल डिग्री की मान्यता रद्द करने के फैसले के बाद, कई पाकिस्तानी डॉक्टर्स पर प्रत्यर्पण की तलवार लटक रही है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने अगस्त महीने में मेडिकल लाइसेंस के लिए जरूरी शैक्षणिक योग्यता में पाकिस्तान की पोस्टग्रैजुएट डिग्री यानी एमएस और एमडी की डिग्री की मान्यता खत्म कर दी थी।

सऊदी के स्वास्थ्य आयोग ने कई पाकिस्तानी डॉक्टरों को टर्मिनेशन लेटर सौंप दिए हैं। सऊदी के स्वास्थ्य आयोग ने बताया था कि व्यावसायिक योग्यता की वजह से पाकिस्तानियों आवेदन खारिज कर दिए गए हैं, क्योंकि नियमों के मुताबिक अब पाकिस्तानी डिग्री स्वीकार्य नहीं है। जिन डॉक्टरों को टर्मिनेशन लेटर मिल गया है, उन्हें सऊदी छोड़ने और प्रत्यर्पण के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया है। सऊदी के मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तान की डॉक्टरी की डिग्री में ट्रेनिंग की कमी है।

जाहिर है सऊदी में काम कर रहे कई पाकिस्तानियों के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं है। बताया जा रहा है कि पाक डॉक्टर्स के साथ हॉस्पिटल के जज करते हैं, उन्हें लगता है कि ये लोग यहां फर्जी डिग्री के साथ आए हैं। इनके काम तक पर जिस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं, उससे इन सबकी आजीविका खतरे में है।

सऊदी के फैसले से प्रभावित हुए पाकिस्तानी डॉक्टरों का आरोप है कि पाकिस्तान का ‘कॉलेज ऑफ फिजीशियन ऐंड सर्जन्स’ ही उनकी दुर्दशा के लिए जिम्मेदार है। जेद्दाह के एक निजी अस्पताल में काम करने वाले एक डॉक्टर ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सऊदी के एक अधिकारी ने उन्हें बताया था कि CPSP ने खुद ही सऊदी के स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी दी थी कि पाकिस्तान की डॉक्टरी की डिग्री रिसर्च आधारित है, क्लीनिकल नहीं। अगर ये सच है तो आप ये सोच सकते हैं कि पाकिस्तान अपनी आवाम के तालीम से भी खिलवाड़ करने से बाज नहीं आता।

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