” नहीं रहे करुणानिधि ! जानिए क्यों देश नहीं भूल पाएगा उन्हें “

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कावेरी अस्पताल द्वारा आज जारी समाचार बुलेटिन में बताया गया की दक्षिण कि महान राजनेता व द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि का निधन हो गया है। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया की चिकित्सा सहायता के बावजूद उनके महत्वपूर्ण अंग बिगड़ रहे थे। वह लंबे समय से बीमार थे और उन्हें गंभीर स्थिति के कारण भर्ती कराया गया था। आइए नज़र डालते हैं पूर्व तमिलनाडु मुख्यमंत्री करुणानिधि से जुड़े कुछ ऐसे तथ्यों पर, जो उन्हें भारत की युवा पीढ़ी के लिए हमेशा चर्चा में रखेंगे।

करुणानिधि के बारे में पाँच प्रभावशाली तथ्य :-

#1. कभी नहीं हारे चुनाव
वह 1969-2011 के बीच की अवधि में तमिलनाडु राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पाँच बार चुने गए थे। उन्होंने साल 1957 में विधानमंडल में प्रवेश किया और तब से कभी भी चुनाव नहीं हारे। सूत्रों के अनुसार, वह केवल एक बार चुनाव से दूर रहे, लेकिन उसके बाद वह लगातार चुने गए।

#2. विधायक (MLA) के रूप में बनाया रिकॉर्ड
60 साल से अधिक समय राजनीती में बिता चुके, करुणानिधि 12 बार विधानसभा सदस्य रहे। उन्होंने अब तक जिस भी सीट पर चुनाव लड़ा, हमेशा जीत दर्ज की। साल 1957 में हुए चुनाव में वो पहली बार विधायक चुने गए। साल 1967 के चुनाव में पार्टी ने बहुमत हासिल किया और अन्नादुराई ने तमिलनाडु के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बनाने का गौरव प्राप्त किया ।

#3. तमिलनाडु के सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री
तमिलनाडु से 5 बार मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को तिरुवरूर के तिरुकुवालाई में हुआ था । तमिल नाटक से लेकर फिल्मों के पटकथा लेखन के साथ- साथ साउथ के महान नेता अन्नादुरई की अपील पर राजनीति में प्रवेश करने वाले करुणानिधि का राजनीतिक जीवन प्रमुखतः किशोरावस्था से ही प्रारम्भ हो गया था। और जैसे ही 2006 विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की, और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेते ही वह तमिलनाडु के सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री बन गए।

#4. लेखनी को छोड़ किया राजनीती में प्रवेश
राजनीति में अपना भाग्य आजमाने से पहले वह तमिल फिल्म जगत के जाने-माने स्क्रिप्ट राइटर हुआ करते थे। उन्होंने 14 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़ दी थी और राजनीती में अपना सफर करने निकल पड़े थे। साल 1937 में जब दक्षिण भारत के स्कूलों में हिन्दी को अनिवार्य भाषा के रूप में कर दिया गया तब दक्षिण भारत में हिंदी विरोध पर खड़े होते हुए करुणानिधि ने भी ‘हिंदी-हटाओ आंदोलन’ में अपना योगदान दिया था। इसके बाद उन्होंने तमिल भाषा को ही अपना हथियार बना लिया और तमिल में ही नाटक, अखबार और फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखने का कार्य करने लगे

#5. लिखी एलिस डुनगन की अंतिम पटकथा
करुणानिधि ने एलिस डुनगन की आखिरी फिल्म के लिए पटकथा लिखी। एलिस डुनगन एक अमेरिकी निर्देशक थे जिन्होंने तमिल फिल्म जगत में एक बड़ा बदलाव लाये । करुणानिधि ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहली फिल्म ‘राजाकुमारी’ की थी जो की साल 1947 में रिलीज हुयी थी । बतौर स्क्रिप्टराइटर करुणानिधि के काम को काफी सराहा जाने लगा। करुणानिधि के बेहतरीन काम करने के तरीके को देखते हुए उनके समर्थक उन्हें ‘कला का विद्वान’ कहकर बुलाने लगे।

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