Home पॉलिटिक्स BSP प्रमुख मायावती से कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा की मुलाकात के मायने क्या हैं ?

BSP प्रमुख मायावती से कांग्रेस के भूपेंद्र हुड्डा की मुलाकात के मायने क्या हैं ?

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इस साल के आखिरी में जिन तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें हरियाणा भी है। हालांकि विधानसभा चुनाव का बिगुल अभी बजा नहीं है, लेकिन सूबे में सियासी सरगर्मियां जरूर तेज हो गई है। BJP ने रोहतक में हुई PM मोदी की रैली के साथ ही अपना चुनावी बिगुल फूंक दिया है। वहीं प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद अब कांग्रेस ने भी चुनावी कवायद शुरू कर दी है। इसी बीच भूपेंद्र सिंह हुड्डा और मायावती की मुलाकात से अटकलों का दौर शुरू हो गया है।

दऱअसल कांग्रेस के दिग्गज नेता और भूपेंद्र सिंह हुड्डा और बीएसपी सुप्रीमो मायावती के बीच दिल्ली में बंद कमरे में एक बैठक हुई। खबरों की मानें तो इस बैठक में कांग्रेस की नई प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा भी मौजूद रहीं। करीब आधे घंटे तक चली इस बैठक में क्या बात हुई, इसको लेकर कोई खबर तो सामने नहीं आई है, लेकिन इस बैठक के बाद से ही प्रदेश के सियासी गलियारों में नई सियासी सुगबुगाहट दिखाई देने लगी है। इतना ही नहीं दोनों दलों के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन के अनुमान लगाए जाने लगे हैं।

इस बीच मायावती की पार्टी बीएसपी की ओर से भी हरियाणा में चुनावी गठजोड़ के संकेत मिलने लगे हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी शासित राज्य की 90 विधानसभा सीटों पर अक्टूबर में होने जा रहे चुनाव में, दोनों पार्टियों में गठबंधन पर सहमति बन सकती है। हालांकि इससे पहले हरियाणा में बीएसपी का इंडियन नैशनल लोक दल से अलग होकर दुष्यंत चौटाला की अगुआई में बनी जननायक जनता पार्टी से गठबंधन था। लेकिन वो चुनाव से पहले ही टूट गया। जिसके बाद मायावती ने हरियाणा की सभी 90 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया था। खबर के मुताबिक दुष्यंत चौटाला की जेजेपी ने बीएसपी को 40 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था, जिसे मायावती ने ठुकरा दिया। और अब कांग्रेस के संग उनकी नजदीकी बढ़ती दिखाई दे रही है।

आपको बता दें कि मुख्य विपक्षी INLD के ज्यादातर विधायकों और नेताओं के बीजेपी में शामिल होने से उसकी ताकत कम हो गई है, तो वहीं राज्य में 2014 तक लगातार दो बार सरकार बनाने वाली कांग्रेस में अंदरूनी कलह अपने चरम पर है। ऐसे में देखने वाली बात होगी कि प्रदेश की सत्ता से बीजेपी को बाहर करने में कांग्रेस के हाथ को बीएसपी के हाथी का साथ मिलता है या नहीं।

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