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महाराष्ट्र-हरियाणा के एग्जिट पोल के नतीजों से बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन ?

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महाराष्ट्र और हरियाणा की सत्ता पर काबिज होने के सपने संजो रही कांग्रेस को, चुनाव बाद सामने आए एग्जिट पोल के नतीजों से जोर का झटका लगा है। एग्जिट पोल के नतीजों से कांग्रेस खासा परेशान है…ऐसा होना लाजिमी है, क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने सत्तारूढ़ बीजेपी के खिलाफ जिन मुद्दों को उठाया, उसे जनता ने नकार दिया। एग्जिट पोल के नतीजों पर बीजेपी के राष्ट्रवाद का मुद्दा महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक सुस्ती जैसे मुद्दों पर भारी पड़ता नजर आ रहा है, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि
महाराष्ट्र-हरियाणा के एग्जिट पोल के नतीजों से बढ़ेगी कांग्रेस की टेंशन ?
तो क्या अब धारा 370 के मुद्दे पर अपना स्टैंड बदलेगी कांग्रेस ?

जानकारों की मानें तो एग्जिट पोल्स के नतीजे कांग्रेस के लिए और मुश्किलें बढ़ा देंगे। लोकसभा चुनाव में शर्मनाक हार और राहुल गांधी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद से पार्टी को नेतृत्व संकट से जूझना पड़ा। आंतरिक कलह, दलबदल के बीच राफेल जैसे मुद्दों को फिर से हवा देना लोकसभा की तरह इस चुनाव में भी कांग्रेस के काम नहीं आया। इतना ही नहीं, दो राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे कांग्रेस नेतृत्व पर दबाव बढ़ा देंगे कि वो जम्मू-कश्मीर पर मोदी सरकार के स्टैंड का विरोध न करे और जनता की भावनाओं के हिसाब से अपना रुख तय करे।
इतना ही नहीं विपक्ष ने चुनाव प्रचार के दौरान नौकरियों के जाने, कई सेक्टरों में निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर सरकार पर निशाना साधा था। लेकिन सुस्त अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के कैंपेन का जनता पर कोई असर होता दिखाई नहीं दे रहा है।

खास बात ये है कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस को खत्म करने का विरोध कर रही कांग्रेस के खिलाफ, और पाकिस्तान के मुद्दे पर बीजेपी एक बेहतर स्थिति में आ जाएगी। 370 के फैसले के बाद ये पहला चुनाव है और जीत से जनता की मुहर भी लग जाएगी। उधर हरियाणा में चुनावी रैलियों के दौरान पीएम मोदी ने वादा किया है कि वो सिंधु नदी का भारत के हिस्से का पानी पाकिस्तान में नहीं जाने देंगे।
इतना ही नहीं अनुकूल नतीजे कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती जैसे सुधारों के साथ आगे बढ़ने के लिए मोदी सरकार को प्रोत्साहित करेंगे।

18 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है और ये नतीजे सरकार की इच्छाशक्ति को और भी मजबूत करेंगे। साथ ही विवादास्पद कानून जैसे सिटिजनशिप अमेंडमेंड बिल और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस कश्मीर के मुद्दे पर अपना स्टैंड बदलती या फिर अपने पुराने रुख पर कायम रहती है।

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