18 June 2021

Jansatta Editorial comment and opinion on Whatsapp Privacy monitoring – निजता पर निगरानी

कुछ समय पहले वाट्सऐप ने जब अपने उपयोगकर्ताओं को नई निजता नीति स्वीकार करने के लिए बाध्य करने जैसे नियम थोपने की कोशिश की, तब उसकी यह जिद विवादों के घेरे में आई कि आखिर वह लोगों की निजता को जोखिम में क्यों डालना चाहता है। उसके बाद बहुत सारे लोगों ने वाट्सऐप की इस मंशा का विरोध किया और दुनिया भर में इसकी तरह सुविधाओं वाले वैकल्पिक मंचों को अपनाने का अभियान भी चल पड़ा। तब वाट्सऐप ने अपनी उस घोषणा पर अमल के विचार को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था और यह कहा था कि वह लोगों की निजता की कद्र करता है। लेकिन अब हाल ही में फिर उसने यह कहा कि उसकी निजता नीति को स्वीकार नहीं करने पर कुछ सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। यह वाट्सऐप का मनमानापन है कि वह अपने फायदे या अघोषित नियंत्रण के लिए लोगों की निजता का सौदा करना चाहता है। इसलिए सरकार ने उचित ही वाट्सऐप को यह हिदायत दी है कि वह लोगों की निजता के साथ खेल खेलना बंद करे। बुधवार को सूचना एवं तकनीक मंत्रालय ने साफ लहजे में वाट्सऐप से अपनी गोपनीयता नीति, 2021 को वापस लेने का निर्देश दिया।

दरअसल, मंत्रालय का यह मानना है कि वाट्सऐप की ओर से निजता नीति में बदलाव गोपनीयता और आंकड़े या ब्योरों की सुरक्षा के मूल्यों को कमजोर करते हैं और इस तरह वे भारतीय नागरिकों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाते हैं। कोई भी जागरूक और सामान्य समझ रखने वाला व्यक्ति इस चिंता से सहमत होगा। लेकिन हैरानी की बात है कि इस कसौटी पर कोई वाजिब उत्तर नहीं होने के बावजूद वाट्सऐप ने इस नीति को लागू करने की ओर कदम बढ़ा दिए। उसने इस बात का भी खयाल रखना जरूरी नहीं समझा कि उसकी नीतियों से भारतीय कानूनों के कई प्रावधानों का उल्लंघन होता है। इसलिए स्वाभाविक ही मंत्रालय ने वाट्सऐप को नोटिस का जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया है और संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाने की बात कही है।

यों भी यह विचित्र है कि वाट्सऐप भारतीय उपयोगकर्ताओं पर जो नियम थोपना चाहता है, यूरोप के लोगों को उससे छूट है। कथित तौर पर वैश्विक मंच होने के नाते वाट्सऐप के इस ‘भेदभावपूर्ण व्यवहार’ का आधार क्या है? किसी सार्वजनिक मंच के उपयोग का मतलब यह नहीं हो सकता कि उसके संचालकों को उपयोगकर्ताओं की निजता पर निगरानी रखने और उसका मनमाना इस्तेमाल करने का अधिकार मिल जाए।

ऐसा लगता है कि वाट्सऐप के कर्ताधर्ता अपने दायरे में आने वाले तमाम लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने की व्यवस्था बनाना चाहते हैं। जबकि अब तक यही वाट्सऐप अपने मंच का उपयोग करने वालों को यह आश्वासन देता रहा है कि यहां आपकी हर गतिविधि शुरू से आखिर तक पूरी तरह निजी और सुरक्षित है। सवाल है कि आखिर अब यही वाट्सऐप क्यों लोगों को अपनी नई निजता नीति के दायरे में लाना चाहता है और शर्तें नहीं मानने वालों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार करना चाहता है।

क्या यह माना जाए कि पहले वाट्सऐप ने लोगों को निजता बनाए रखने का भरोसा देकर अपने ऊपर निर्भर किया और अब सबकी निजता पर नजर रखना चाहता है? साइबर विशेषज्ञों ने निजता पर निगरानी और उसके मनमाने इस्तेमाल को लेकर जैसी चिंता जताई है, अगर उस पर गौर नहीं किया गया तो आने वाले वक्त में वाट्सऐप जैसे मंचों के जरिए लोगों को नियंत्रित करने का भी खेल चल सकता है! यह निजता के अधिकारों के हनन के साथ-साथ एक संप्रभु देश के नागरिकों की स्वतंत्रता को भी नियंत्रित करने जैसा होगा!



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