18 June 2021

Jansatta Editorial article in dunia mere aage column on stranger way in society – अजनबी होते रास्ते

लगभग दो महीनों के बाद तीसरी मंजिल के फ्लैट से उतर कर सुबह बाहर टहल रहा था। हमारे घर के पास जो मदर डेयरी की दुकान है, वहां से कुछ लोग ब्रेड और दूध ले रहे थे। उसके पास सड़क पर दो बच्चे चौराई-पालक, नेनुआ, लौकी, करेला, परवल, धनिया-मिर्च का ठेला लगाए हुए था। एक बच्चा खरबूजा-तरबूज बेच रहा था। थोड़ा आगे बढ़ता चला गया तो एक आठ-नौ साल का बच्चा एक हाथ में बोरी और एक हाथ में छोटा डंडा लेकर तेज-तेज चलता दिखा। एक सफेद रंग का कुत्ता उसे देख कर भौंक रहा था। वह बच्चा तेज कदमों से चलता हुआ पीछे मुड़-मुड़ कर कुत्ते को देखता था कि वह नजदीक तो नहीं आ रहा है! मैं आज तक यह नहीं समझ पाया कि सड़क पर रहने वाले कुत्ते अपने भौंकने में इतना ‘सेलेक्टिव’ कैसे होते हैं? कैसे वे इस तरह भौंकने के लिए ऐसे लोगों को चुनते हैं? उसी सड़क पर अन्य लोग भी आते-जाते हैं, लेकिन वे कुत्ते कूड़ा बीनने वाले बच्चों पर ही क्यों अपनी धौंस दिखाते हैं?
थोड़ा आगे एक दूसरी सोसाइटी के बाहर बहुत-सी गाड़ियां खड़ी रहती हैं। उस दिन भी थीं। मैं लाइन से लगी गाड़ियों के बगल से गुजर रहा था। बस एक गाड़ी स्टार्ट थी, लेकिन ड्राइवर की सीट पर कोई दिख नहीं रहा था। अगल-बगल भी कोई व्यक्ति नहीं था। आसपास सिर्फ दूसरी गाड़ियां थीं, जिन्हें देख कर बताया जा सकता है कि वे लंबे समय से नहीं चली हैं। मैं आगे बढ़ गया। टहलने के दूसरे चक्कर में फिर वहीं पहुंचा। अभी भी गाड़ी स्टार्ट ही थी। मेरी नजर गाड़ी की पिछली सीट पर गई। शायद दो लोग थे। मैं टहलते हुए आगे बढ़ गया।

सुबह के नौ बज चुके थे। चाय की दुकान जो सड़क पर थी, वह पूर्णबंदी के चलते एक दीवार के पीछे चली गई है। चाय मिलती है वहां, लेकिन अब सड़क से वह मेज-स्टोव दिखाई नहीं देता है। दो पुरुष सफाईकर्मी सड़क के कोने पर खड़े होकर चाय पी रहे थे। तीन महिला सफाईकर्मी उनके पास ही बैठी थीं। वे चाय नहीं पी रही थीं। चाय पीता हुआ एक आदमी कह रहा था कि वह इस साल अपने बेटे का रिश्ता करेगा। बस लड़की अच्छी चाहिए। मैं चलता जा रहा था। आगे कूड़ा उठाने वाली गाड़ी खड़ी थी। ड्राइवर अपनी सीट पर जमा हुआ था। इन दिनों इस गाड़ी में स्वच्छता वाला गाना नहीं बज रहा है। कभी-कभी किसी चीज की अनुपस्थिति आपको उसके होने से अधिक याद आती है। इस गाड़ी के साथ वाले आदमी ने कूड़े में से एक लिफाफा उठाया। लिफाफा बंद था और किसी कूरियर कंपनी का स्टीकर था उस पर। मैं दो कदम आगे बढ़ चुका था। हमारे पीछे जो भाई साहब टहलते हुए आ रहे थे, उनसे वह लिफाफे का पता पढ़वाता है।

सबको पता है कि आलस एक बुरी आदत होती है, लेकिन आलस करना सबको अच्छा लगता है। एक दोस्त की बात याद आ जाती है कि देर तक मास्क भी नहीं लगाना चाहिए। वैसे महामारी के बाद का एक रक्षा कवच भी है मेरे पास, जिसमें दो-तीन महीने तक कोई मेहनत वाले काम के लिए जोर नहीं देगा! जब सब काम आराम-आराम से यानी धीरे-धीरे करना है तो मुझे लगता है कि बस अब आज अधिक नहीं टहलना चाहिए।

मैं वापस लौटा। कार की सफाई करने वालों को अभी सोसाइटी यानी रिहाइशी इमारत के परिसर में जाने की इजाजत नहीं है। सुबह वे मुख्य दरवाजे के बाहर अपनी बाल्टी और कपड़ा लेकर बैठे थे। जिन लोगों ने अपनी गाड़ी बाहर लगा दी थी, उन्हें वे साफ कर रहे थे। घरों में सहायिका का काम करने वाले किसी पुरुष या महिलाओं को भी भीतर जाने की इजाजत नहीं है। डर कितने लोगों को किससे कितना दूर कर देता है, क्या कुछ छीन लेता है! सोसाइटी के गेट पर गार्ड हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति को फिर से नकारते हुए मैं सीधे देखता हुआ चला जा रहा था।

सोसाइटी में कुछ महीनो पहले एक छोटा जिम बना था। अब उस पर धूल बैठ चुकी है। बच्चों के पार्क वाले झूले अनाथ बच्चों की तरह निरीह खड़े हैं। खिलती और खिलखिलाती जगहें शांत और सूनी पड़ी हैं। सोचता हूं कि सब ओर सब चुप हैं, लेकिन सब जगह इंतजार हो रहा होगा। सब ठीक हो और सब एक दूसरे से मिलें। जिम पर जमी धूल साफ हो… झूले फिर से बहार की तरह झूम उठें।

सीढ़ी के नीचे कई बच्चों की साइकिल खड़ी थी। वे महंगी साइकिलें थीं। लेकिन आजकल उनकी सवारी कोई नहीं करता है। इसलिए वे लंबे समय से एक जगह पर खड़ी हैं। उन पर काफी धूल जम गई है। कम से कम धूल को तो साफ किया ही जा सकता था। लेकिन डर बहुत कुछ करने से रोक देता है। मुझे एक साइकिल मरम्मत करने वाले ने बताया था कि साइकिल के टायर चलाने से उतने खराब नहीं होते, जितना एक जगह खड़ी रखने से। शायद जीवन का भी यही सूत्र हो! मैं टहल कर लौट आया था। लेकिन घर के आसपास ही ऐसा क्यों लग रहा था जैसे मैं पहले यहां कभी आया हूं!




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