18 June 2021

Former BCCI President N Srinivasan Daughter and TNCA Chief Rupa Gurunath Found Guilty Of Conflict Of Interest By retired Justice DK Jain – BCCI के पूर्व अध्यक्ष श्रीनिवासन की बेटी ‘हितों के टकराव’ की दोषी, रूपा गुरुनाथ को छोड़ना पड़ेगा टीएनसीए अध्यक्ष का पद?

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन की बेटी रूपा गुरुनाथ ‘हितों के टकराव’ की दोषी पाईं गईं हैं। रूपा गुरुनाथ इस समय तमिलनाडु क्रिकेट संघ (टीएनसीए) की अध्यक्ष हैं। बीसीसीआई के नैतिक अधिकारी जस्टिस (रिटायर्ड) डीके जैन ने रूपा गुरुनाथ को ‘हितों के टकराव’ का दोषी पाया है। ऐसे में बड़ा सवाल अब यह है कि क्या रूपा गुरुनाथ को टीएनसीए अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ेगा।

रूपा गुरुनाथ के टीएनसीए अध्यक्ष के पद पर बने रहने में अब बीसीसीआई का रोल अहम हो गया है। बीसीसीआई की मान्यता प्राप्त इकाइयों की पहली महिला अध्यक्ष रूपा गुरुनाथ इंडिया सीमेंट्स लिमिटेड (आईसीएल) की पूर्णकालिक निदेशक हैं। आईसीएल के चेन्नई सुपकिंग्स क्रिकेट लिमिटेड (Chennai SuperKings Cricket Limited या सीएसकेसीएल) से करीबी संबंध के कारण रूपा को हितों के अप्रत्यक्ष टकराव का दोषी पाया गया है। जस्टिस डीके जैन (रिटायर्ड) ने अपने 13 पन्नों के आदेश में कहा है कि सीएसकेसीएल आईसीएल समूह का हिस्सा है। सीएसकेसीएल के पास आईपीएल फ्रेंचाइजी चेन्नई सुपरकिंग्स का स्वामित्व है।

टीएनसीए इस आदेश को अदालत में चुनौती दे सकता है। रूपा के खिलाफ शिकायत इंदौर के संजीव गुप्ता ने कराई थी। संजीव गुप्ता मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ (एमपीसीए) के पूर्व आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने पिछले साल खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

जस्टिस डीके जैन (रिटायर्ड) ने आदेश में लिखा, ‘ये सभी तथ्य दर्शाते हैं कि आईसीएल समूह के अंतर्गत कई इकाइयों का जाल बुना गया। इस जाल बुनने में सीएसकेसीएल भी शामिल है। इन सभी इकाइयों का प्रबंधन और संचालन प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रूप से आईसीएल के बोर्ड के पास था। इसके बावजूद बचाव पक्ष ने कहा कि आईसीएल की सीएसकेसीएल में कोई हिस्सेदारी नहीं ।’

उन्होंने कहा, ‘मौजूदा तथ्यात्मक हालात को देखते हुए यह निष्कर्ष निकालना सुरक्षित होगा कि प्रतिवादी (रूपा), आईसीएल की पूर्णकालिक निदेशक और प्रमोटर के रूप में, उनका आईसीएल शेयरहोल्डर्स ट्रस्ट एवं सीएसकेसीएल के निदेशकों से करीबी रिश्ता है जिनका बीसीसीआई के साथ फ्रेंचाइजी करार है। यह नियम 1 (1) के अंतर्गत हितों के टकराव का प्रारूप है।’

बीसीसीआई के नैतिक अधिकारी के रूप में जस्टिस (रिटायर्ड) डीके जैन का यह फैसला अंतिम आदेशों में से एक हो सकता है। दरअसल, उनका अनुबंध सात जून को खत्म हो रहा है। अब बीसीसीआई को फैसला करना है कि वे अनुबंध बढ़ाते हैं या नहीं। यह देखना भी रोचक होगा कि उनके इस फैसले पर बीसीसीआई का रुख क्या रहेगा। क्या वे रूपा गुरुनाथ को टीएनसीए अध्यक्ष पद से हटने के लिए कहते हैं या नहीं। बोर्ड राज्य संघ को इस फैसले के खिलाफ नए नैतिक अधिकारी के समक्ष या अदालत में अपील की स्वीकृति भी दे सकता है।



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