15 June 2021

Corona Journalist apologized for saying apathy said It was a huge mistake to report on election instead of Covid,कोरोना: आपबीती बता कर पत्रकार ने मांगी माफी, ल‍िखा- कोविड के बजाय चुनाव पर खबरें करना भारी भूल थी

कोरोना वायरस ने देश को लस्त-पस्त कर दिया है। हालात इस कदर क्यों बिगड़े? विपक्ष सारा दोष सरकार पर डाल रही है। सरकार विपक्ष को निगेटिविटी फैलाने के लिए कोस रही है। सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं कि जब जनवरी आते-आते वाइरस के नए स्ट्रेन और दूसरी लहर के इशारे मिलने लगे थे, तब सरकार क्या कर रही थी।

यही सवाल देश के मीडिया से भी है कि वह क्या कर रहा था। जब दिल्ली में कोविड के लिए बना टेम्परेरी अस्पताल तोड़ा जा रहा था, तब मीडिया में ऐसी खबरें क्यों नहीं उछलीं कि कोरोना की लहर आ रही है और यह अस्पताल तब बहुत काम आएगा क्योंकि नई लहर जबर्दस्त होगी। मीडिया के हर हिस्से पर लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता। लेकिन एक पत्रकार ने खुद के क‍िए पर अपनी गलती मानी है और अफसोस जताया है कि वह अपना फोकस कोरोना पर क्यों नहीं रख सका।

यह समझ इस पत्रकार ने बुुुुरी आपबीती झेल कर और बड़ी कीमत देकर पाई है। उसका पूरा परिवार कोविड से ग्रसित हो गया था। सौभाग्य से सब लोग स्वस्थ हो गए हैं। पत्रकार ने लक्ष्य से भटकने के लिए जनता से माफी मांगी है। यह पत्रकार हैं दीपक शर्मा।

उन्होंने अपने मन की व्यथा फेसबुक पर व्यक्त की है। वे साफ लिखते हैः दूसरी लहर के कहर के लिए सरकार, प्रशासन, अदालतें, निजी संस्थाएं और मीडिया, सभी अपनी जिम्मेदारी में फेल हुए हैं। मार्च से ही महाराष्ट्र के डॉक्टर, संक्रामक रोगों के विशेषज्ञ और यहां तक कि केंद्र के स्वास्थ्य सलाहकार (वायरॉलजिस्ट और एपिडेम्यॉलजिस्ट) आगाह कर रहे थे कि देश में दूसरी लहर आने वाली है…जो ज्यादा खतरनाक होगी। सरकार को इस चुनौती से निपटने के लिए गंभीरता से तैयारी करनी होगी।

परन्तु भारत में सारा फोकस तो उस समय चुनाव पर था। समाचार पत्र, टीवी चैनल, न्यूज एजेंसियां—-किसी को कोविड19 की तरफ ध्यान न था। नतीजा यह हुआ कि एक माह बाद नई लहर ने कहर ढा दिया। किसी तैयारी के अभाव में समूचे सिस्टम ने हाथ खड़े कर दिए। हजारों मरीज बेड, इलाज और ऑक्सीजन के अभाव में मारे गए। दीपक शर्मा इसके आगे मामले को सीधे पर्सनल लेवल पर ले आते हैं। कहते हैः खोजी पत्रकार के रूप में मैं भी अपना दायित्व निभाने में नाकाम रहा।

एक साल पहले मैंने कई बड़े वायरॉलजिस्ट, वैक्सीन एक्सपर्ट और संक्रामक रोगों के विशेषज्ञों के दर्जनों इंटरव्यू किए। खबरें ब्रेक कीं। लेकिन जब देश को सचमुच सावधान करने की आवश्यकता थी, उस समय मैं चुनाव और हल्के किस्म की राजनैतिक खबरों में डूबा रहा। 27-28 साल की पत्रकारिता में यह मेरी सबसे बड़ी भूल थी।

दीपक कहते हैं कि जब खुद पर बीती तो दूसरों का दर्द महसूस हुआ। सो, अब दस-बारह दिनों में आंख खुली हैं।….आखिर इतने अनुभव के बाद भी मैं विशेषज्ञों की चेतावनी क्यों नहीं भांप सका। मैं तो आइसीएमआर के अधिकारियों और वायरॉलजिस्टों को जानता भी था। तब भी मैंने उनसे फरवरी-मार्च में संपर्क क्यों नहीं किया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्युनॉलजी के वैज्ञानिकों को भी जानता हूं, उनसे भी नहीं मिला।

जब राधास्वामी परिसर में जब दस हजार बेड वाला देश का सबसे बड़ा टेम्परेरी कोविड अस्पताल खत्म किया जा रहा था तो भी मैंने खबर नजरअंदाज कर दी, जबकि एक डॉक्टर ने चेताया था कि नई लहर में यह अस्पताल बहुत काम आएगा। मगर मेरा दिमाग चुनाव में लगा रहा। यह अगर तोड़ा न गया होता तो दिल्ली के सैकड़ों लोग बच जाते।

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दीपक कहते हैं मन में अपराध बोध जैसा है।…आभास हो रहा है कि बेहतर रिपोर्टिंग की सख्त जरूरत है। पर्देदारी बहुत हो चुकी। परदे सिस्टम को ढकते हैं। उनके हटते ही व्यवस्था नंगी हो जाती है। इसके आगे वे भावुक हो उठते हैं, “मुझे पंडारा रोड पर मकान नहीं चाहिए…रायबहादुर, खानबहादुर नहीं बनना…(एक सीनियर पत्रकार का नाम लेकर कहते हैं कि उनकी तरह) पद्मश्री नहीं चाहिए…मुझे आप सबके लिए बेहतर रिपोर्टिंग करनी है।” ऐसी रिपोर्टिंग कि जहां आगाह करने की जरूरत हो वहां आगाह कर सकूं और जहां परदा हटाने की जरूरत हो वहां परदा हटा सकूं। “उम्मीद है, अब तक की गलती आप माफ करेंगे। ”

इससे पहले दीपक ने खाली होते ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ मां को अस्पताल में दाखिल कराने का मार्मिक विवरण भी फेसबुक पोस्ट में लिखा है। मां की हालत गंभीर…सिलिंडर में 10-15 मिनट की ऑक्सीजन शेष… घर के बगल में फोर्टिस में जगह नहीं, मैक्स का भी इन्कार…पत्नी को संक्रमण के चौथे दिन तेज बुखार..मां को नीचे उतारना है..ऑक्सीजन लेवल 66 तक गिर गया है…कोई सुने न सुने ईश्वर ने सुन ली…मां खुद सीढ़ियां उतर गईं…डीआरडीओ अस्पताल पहुंचे। 72 घंटे बाद बेहतर हुई। कुछ दिन बाद पत्नी और बेटी की स्थिति भी अच्छी हो गई।

अपनी असहाय हालत का बयान करने के बाद दीपक ने लोगों से कहा है कि कोविड संक्रमण को गंभीरता से लीजिए। तुरंत डाक्टर, दवा, अस्पताल की चिंता में लग जाइए। विलंब किया तो बहुत विलंब हो जाएगा। दीपक का यह पोस्‍ट काफी शेयर हो रहा है। अलग-अलग लोग तरह-तरह के कमेंट के साथ इसे शेयर कर रहे हैं और पोस्‍ट पर भी कमेंट कर रहे हैं। पत्रकार व फ‍िल्‍ममेकर व‍िनोद कापड़ी ने ल‍िखा है क‍ि दीपक ने यह ह‍ि‍म्‍मत द‍िखाई है तो शायद बाकी मीड‍िया का भी जमीर जागे।



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