Home पॉलिटिक्स कांग्रेस के ये नेता हुए पीएम मोदी के ‘मुरीद’, जमकर कर रहे है तारीफ़, क्या है इसके पीछे की वजह ?

कांग्रेस के ये नेता हुए पीएम मोदी के ‘मुरीद’, जमकर कर रहे है तारीफ़, क्या है इसके पीछे की वजह ?

1 second read
Comments Off on कांग्रेस के ये नेता हुए पीएम मोदी के ‘मुरीद’, जमकर कर रहे है तारीफ़, क्या है इसके पीछे की वजह ?
0
86

वैसे तो किसी भी लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप का होना आम बात है। लेकिन सत्ता के गलियारों में इन दिनों आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर ने सारी हदें पार ली है। विपक्ष सियासी फायदे के लिए हर मुद्दे पर सीधे पीएम मोदी को निशाने पर लेते हैं। लेकिन विपक्ष को फायदा होने के बजाय इससे नुकसान ही हो रहा है, ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि ये कहना है, कांग्रेस के सीनियर नेता जयराम रमेश का।

दऱअसल कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के शासन का मॉडल ‘पूरी तरह नकारात्मक गाथा’ नहीं है। उनके काम के महत्व को स्वीकार नहीं करना और हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करके कुछ हासिल नहीं होने वाला है। रमेश ने कहा कि ये वक्त है कि हम मोदी के काम और 2014 से 2019 के बीच उन्होंने जो किया, उसके महत्व को समझे, जिसके चलते वो सत्ता में लौटे। इसी की वजह से 30 फीसदी वोटरों ने ने उनकी सत्ता वापसी करवाई। लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी को 37.4 फीसदी, जबकि एनडीए को कुल मिलाकर 45 फीसदी वोट हासिल हुए।

कांग्रेस नेता ने कहा कि वो ऐसी भाषा में बात करते हैं, जो उन्हें लोगों से जोड़ती है। जब तक हम ये न मान लें कि वो ऐसे काम कर रहे हैं, जिन्हें जनता सराह रही है और जो पहले नहीं किए गए, तब तक हम इस व्यक्ति का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। इतना ही नहीं उन्होंने आगाह किया कि साथ ही अगर आप हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने जा रहे हैं, तो आप उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे। रमेश ने दो टूक कहा कि वो किसी से पीएम की सराहना या तारीफ करने के लिए नहीं कह रहे है, बल्कि चाहते हैं कि राजनीतिक वर्ग कम से कम उन बातों को माने, जो वो शासन में लेकर आए खासतौर से ‘शासन के अर्थशास्त्र’ के संदर्भ में।

उन्होंने कहा कि 2019 में राजनीतिक विमर्श में हम सभी ने उनकी एक या दो योजनाओं का मजाक उड़ाया, लेकिन सभी चुनावी अध्ययनों में ये सामने आया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना अकेली ऐसी योजना रही, जो उन्हें करोड़ों महिलाओं से जोड़ पायी। इसने उन्हें ऐसा राजनीतिक खिंचाव दिया, जो उनके पास 2014 में नहीं था। अब जयराम रमेश की इन बातों का पार्टी नेताओं पर क्या असर होता है, ये देखना दिलचस्प होगा।

Check Also

क्या महाराष्ट्र में बिना BJP के सरकार बनाना शिवसेना का आखिरी सुसाइड है ?

क्या महाराष्ट्र में बिना BJP के सरकार बनाना शिवसेना का आखिरी सुसाइड है ? तो क्या मुख्यमंत्…