Home मनोरंजन मूवी रिव्यु-सामाजिक मुद्दों पर बनी संवेदनशील फ़िल्म छपाक

मूवी रिव्यु-सामाजिक मुद्दों पर बनी संवेदनशील फ़िल्म छपाक

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लक्ष्मी अग्रवाल

आज के दौर में छपाक जैसे सवेंदनशील मूवी का आना जरूरी है। हम मूवी क्यों जाते हैं सिर्फ अपने मनोरंजन के लिए। लेकिन हमारे आसपास क्या हो रहा है , उसे जान के भी हम अनभिज्ञ बने रहते हैं। अगर आपके मन में थोड़ी सी मानवता  है तो ये फ़िल्म जरूर देखें। इस फ़िल्म की डायरेक्टर मेघना गुलजार है,  जिन्होंने राजी और तलवार जैसे मूवी में भी अपनी काबिलियत साबित की है। यह फ़िल्म बहुत ही सहजता से लोगों को समाज का आईना दिखाती है।

छपाक

फिल्म की कहानी

छपाक की कहानी एक एसिड सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की है। इस फ़िल्म में उनका नाम मालती रखा गया है। लक्ष्मी अग्रवाल जिसे आज हर घर में लोग उनकी बहादुरी के लिए जानते हैं। जिन्होंने अपने दोषियों को सजा दिलवाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ी , साथ ही उनके अथक प्रयास के चलते ही खुले में एसिड की बिक्री नही हो, इसके लिए कानून बना।

लक्ष्मी अग्रवाल

पूरी कहानी में लक्ष्मी की जिंदगी को दर्शाया है। उसके जीवन में आये उतार- चढाव को दिखाया गया है । एक लड़की के सपने कैसे एक एसिड अटैक के बाद दम तोडते हैं और कैसे उन मुश्किलों से लड़कर फिर से सपने देखना शुरू करती है , उसे बड़ी ही संवेदनशीलता के साथ इस फ़िल्म में बताया गया है। कैसे एक एसिड सर्वाइवर मेडिकल प्रकिया के दौरान पल -पल मरती है और उसे देख कर उसके परिवार वाले भी मरते हैं। कैसे उस पल जमाना उसके साथ व्यवहार करता है उसे बड़े करीब से दिखाया गया है। दोषियों को सजा दिलाने के लिए जब एक एसिड सर्वाइवर आगे बढ़ती है तो उसे किस तरह के कानूनी पचड़ों से बढ़ कर आगे जाना होता है सब बहुत बारीकी से बताया गया है। बस फ़िल्म का पहला पार्ट बहुत धीरे धीरे आगे बढ़ता है जो कही पर दर्शकों को बोर कर सकता है , पर कहानी इतनी संवेदनशील है कि आप इससे अपने आप को जोड़ कर रख पाएंगे और दूसरे पार्ट में कहानी तेजी से आगे बढ़ती है। कहानी में बहुत ज्यादा ऐसे डायलॉग नही रखे गए है कि लोग बोल उठे वाह। कहानी बहुत ही सिम्पल तरीके से आगे बढ़ती है।

एक्टिंग और डायरेक्शन

दीपिका पादुकोण की एक्टिंग किसी परिचय की मोहताज नही है और मालती के रोल को अपने अभिनय से जीवंत कर दिया है या कहा जा सकता है कि अब तक सबसे बेस्ट एक्टिंग उन्होंने इस फ़िल्म में की है। मालती के दुख- दर्द , खुशी , हर लम्हे को उन्होंने बखूबी निभाया है। इस फ़िल्म में उनका बेहतरीन साथ दिया है विक्रांत मैसी ने। उनकी एक्टिंग बहुत ही जबरदस्त है। बाकी सभी कलाकारों ने भी उम्दा काम किया है। वास्तविक एसिड सर्वाइवरों ने भी बहुत बढ़िया काम किया है। कहा जा सकता है कि इस फ़िल्म में एक्टिंग के दृष्टिकोण से किसी कलाकार ने निराश नही किया है। बहुत ही सोच समझकर कर कलाकारों का चयन इस फ़िल्म में किया गया है।

क्यों देखे

यह एक समाज को आइना दिखाने वाली सवेंदनशील फ़िल्म है , जो  हर किसी को देखना चाहिए।

दीपिका की फैन फॉलोइंग बहुत है , साथ ही जेएनयू विवाद के चलते इस फ़िल्म को पब्लिसटी भी काफी मिल गई है । कुछ लोग इस फ़िल्म को बॉयकॉट करने की भी सलाह दे रहे है । वैसे राजनीति को साइड रखे तो यह फ़िल्म एक बार जरूर देखने लायक है क्योंकि यह कहानी हर उस युवती है जिसने सपनो को पूरा करने के लिए संघर्ष किया है। यदि इस फिल्म 5  में से 3.5 स्टार देना सही होगा|

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