जानिए भाई दूज को क्यों कहते हैं यम द्वितीया,और क्या है इस दिन की विशेष मान्यता

भाईदूज कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

हिंदू धर्म में हर त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है। इसी प्रकार भाईदूज के त्योहार का भी विशेष महत्व है। भाईदूज कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। जिसे यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है। भाईदूज का त्योहार दिवाली के दो दिन बाद होता है। इस दिन बहनें भाइयों का तिलक करके उनकी लंबी आयु,सुख व समृद्धि की कामना करती हैं।

श्री कृष्ण से जुड़ी है पौराणिक कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार भाईदूज का पर्व श्री कृष्ण से भी जुड़ा है। कथा के अनुसार जब श्री कृष्ण राक्षस नरकासुर को मारने के बाद घर पर लौटे तो उनका स्वागत उनकी बहन सुभद्रा ने फूल, फल और मिठाई से किया। इसके बाद सुभद्रा ने दीया जलाकर और भगवान श्री कृष्ण के माथे पर तिलक लगाकर एक हजार से ज्यादा सालों तक भाई के जीवित रहने की कामना की। मान्यता है कि इसके बाद ही भाईदूज मनाने की परपंरा बन गई।

मान्यताओं की मानें तो इस दिन भाई बहन को यमुना जी में स्नान करने से यम और यमुना दोनों से ही विशेष आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। यमुना जी मृत्यु के देवता यम की बहन हैं। अगर यमुना में स्नान संभव ना हो तो भाई बहन को घर पर जल्दी स्नान कर पूजा आदि कर लेने चाहिए और फिर बहन अपने भाई को टीका लगाती हैं और ईश्वर से भाई के अच्छे स्वास्थ्य,सुख समृद्धि की कामना करती है।

भाईदूज का मुहूर्त-

भाई दूज तिलक समय- 01:10 से 03:18 तक

अवधि- 2 घंटा 8 मिनट

द्वितीया तिथि प्रारंभ-16 नवंबर 2020 को सुबह 07:06 बजे से

द्वितीया तिथि समाप्त- 17 नवंबर 2020 को सुबह 03:56 बजे तक

 

 

 

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