Home आस्था बसंत पंचमी 2020- ऐसे करे माँ सरस्वती की आराधना और करें उन्हें प्रसन्न

बसंत पंचमी 2020- ऐसे करे माँ सरस्वती की आराधना और करें उन्हें प्रसन्न

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बसंत पंचमी माँ सरस्वती की आराधना का दिन होता है। माँ सरस्वती विद्या की देवी है और इस दिन उनकी पूजा कर उनसे विद्या, बुद्धि, ज्ञान के लिए प्रार्थना की जाती है। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी नाम से भी जाना जाता है| यह पर्व बंगाल, नेपाल और पूर्वी भारत में बहुत ही अच्छे से मनाया जाता है|

 

vasant panchami

 

यह त्यौहार बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। बसंत अर्थात खुशियों का आगाज। इस समय मौसम खुशनुमा होता है, जब ना ज्यादा गर्मी ना ही ज्यादा ठंड होती है। इस समय खेतों में फसल लहलहाने लगती है और चारों ओर खेतों में गेहूं की बालियाँ, सरसों के पौधे सुनहरा रंग लिए दिखाई देते हैं| इस ऋतू के आगमन पर प्रकृति का कण-कण खिल उठता है| हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन कोई भी कार्य जैसे शादी, गृह प्रवेश, लेनदेन करना शुभ माना जाता है। उसके लिए कोई शुभ मुहूर्त देखने की आवश्यकता नही होती है।

इस साल 29 जनवरी को यह त्यौहार मनाया जाएगा। यदि हिन्दू कैलेंडर की बात की जाए तो हम यह पर्व माघ मास शुक्ल पक्ष की पंचमी  को मनाते हैं। अन्य त्यौहार की तरह इस त्यौहार में भी भ्रांति बनी हुई है कि यह त्यौहार कब मनाया जाएगा और उसके लिए शुभ मुहूर्त कब है।

बसंत पचंमी तिथि –

बसंत पचंमी का प्रारंभ –  29 जनवरी 2020 को सवेरे 10.45 बजे से।

बसंत पचंमी की समाप्ति- 30 जनवरी2020 को दोपहर 1.19 बजे

बसंत पचंमी की पूजा का शुभ मुहूर्त-
29 जनवरी 2020 को 10:45 AM से 12:52 PM तक।

बसंत पंचमी का महत्व

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार इस दिन माँ सरस्वती का जन्म हुआ था, और माता सरस्वती विद्या, बुद्धि, विवेक की देवी है। उनकी आराधना कर हम सही ज्ञान , विवेक, बुद्धि वरदान में मांगते है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। कई जगहों पर इस दिन मेले का आयोजन होता है। दूसरा इस पर्व को मनाने का सबसे बड़ा तर्क है, मौसम में परिवर्तन। बसंत ऋतु का आगाज होने पर प्रकृति लहलहा उठती है और इस बसंत ऋतु को सभी ऋतुओं का राजा माना गया है। सेहत की दृष्टि से भी यह ऋतु श्रेष्ठ मानी गई है। कड़ाके की ठंड से राहत मिलना शुरू हो जाती है। इस दिन लेखक, नाटककार, संगीतकार,  नृत्यकार सभी अपने उपकरणों , वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं|

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माता सरस्वती की पूजन विधि

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इस दिन विद्यार्थियों को जरूर माता सरस्वती की पूजा करना चाहिए। इस दिन विद्यालयों में माता सरस्वती की विशेष आराधना का कार्यक्रम किया जाता है। बंगाल में तो इस इस दिन हर घर में विशेष पूजा की जाती है। आइये जाने माता सरस्वती की आराधना कैसे करें।

  • माता सरस्वती को पीला रंग विशेष प्रिय है, अतः इस दिन स्नान कर पीले वस्त्र पहन कर, पीले फूलों के द्वारा माता सरस्वती की पूजा करे|
  • छोटे बच्चें जिन्हें अक्षर ज्ञान नही है और वह इस क्षेत्र में नई शुरुवात करने जा रहे हैं, उन्हें इसी दिन से नई शुरुआत करवानी चाहिए। छोटे बच्चों को स्लेट , पेंसिल उपहार स्वरूप देना चाहिए।
  • इस दिन पीला भोजन या खिचड़ी खाये।
  • इस दिन पाठ्य  किताबों की पूजा करें।
  • पूजा के दिन माता सरस्वती की वंदना इस मंत्र के द्वारा करें।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा

 

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