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राजस्थान में सचिन पायलट को सियासी पटखनी दे पाएंगे गहलोत ?

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राजस्थान में दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 21 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे। ये चुनाव सूबे के सीएम अशोक गहलोत के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। ये चुनाव एक तरह से गहलोत के लिए अग्निपरीक्षा सरीखा साबित होने वाला है। अगर वो इसमें चूकते हैं, तो इससे सचिन पायलट के सिर उठाने की संभावना बढ़ सकती है, ऐसे में उन्होंने उससे पहले ही सोनिया गांधी के सामने एक शतरंजी चाल चल दी है।

इस बीच जो जानकारी सामने आ रही है, उसके मुताबिक राजस्थान के सियासत में अक्टूबर महीने में बड़े फेरबदल की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों की मानें तो निकाय और पंचायती चुनावों से पहले ही गहलोत ने मंत्रिमंडल और प्रदेश कांग्रेस संगठन में फेरबदल करने का प्रस्ताव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को दे दिया है। खबर है कि गहलोत ने प्रदेश में दो डिप्टी सीएम बनाने के साथ ही, करीब आधा दर्जन खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को हटाने का प्रस्ताव भी सोनिया को दिया है।

जानकारों की मानें तो लोकसभा चुनाव में अशोक गहलोत देशभर में मोदी लहर होने के बहाने से बच गए थे, लेकिन इस बार उपचुनाव में इन्हें अपने 9 महीने के कामकाज का ब्यौरा देना है। इसके अलावा बीजेपी की ओर से पहली बार जाट प्रदेश अध्यक्ष बनाने से भी कांग्रेस पर दबाव बढ़ गया है। यही वजह है कि उन्होंने सोनिया के सामने प्रदेश में एक व्यक्ति-एक पद सिद्धांत को भी लागू करने की मांग की है। इस वजह से डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट पर भी एक पद छोड़ने का दबाव बन गया है।

हालांकि कांग्रेस आलकमान की ओर से सचिन पायलट को एक पद चुनने की छूट दी गई है। इसके अलावा करीब एक दर्जन मंत्री और विधायकों को संगठन के पदों से हटाया जाएगा। खबर है कि मंत्रिमंडल और संगठन से हटाए जाने वाले विधायकों में से कई सचिन समर्थक भी है।

जानकारी के मुताबिक अगर सचिन पायलट डिप्टी सीएम का पद छोड़ते हैं, तो जाट और दलित नेता के तौर पर दो डिप्टी सीएम बनाने के फॉर्मूले को लागू किया जाएगा। वहीं अगर पायलट अध्यक्ष का पद छोड़ेंगे, तो दलित नेता को पार्टी की कमान और किसी जाट नेता को डिप्टी सीएम बनाने का फार्मूला गहलोत की ओर से आलाकमान को सुझाया गया है। हालांकि अपनी इस शतरंजी चाल से सचिन पायलट को सियासी पटखनी देने में गहलोत कहां तक कामयाब होते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा।

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